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Friday, May 8, 2009

election

इलेक्शन इलेक्शन ,,अब उसका भूत भी धीरे धीरे उतरने लगा है वादों का नारों का शोर अब थम रहा है वोट भी उम्मीद से कम पड़े इसका कारन क्या है ,आखिर क्यों इतने प्रचार के बाद भी जनता में मतदान का उत्साह नही जगा जिस जागरूकता की बाद चुनाव से पहले हम कर रहे थे वो सब कहाँ ख़त्म हो गया अगर इसका जवाब आपके पास है तो इस देश के उद्धारकों को बताइए.

Tuesday, April 28, 2009

कह तो ले ते है कहकर ही कुछ जी हल्का कर लेते है ।
उसपार अभागे मानव का अधिकार न जाने क्या होगा,इस पर प्रिये मधुहय तुम हो उस पर न जाने क्या होगा

Monday, April 27, 2009

kash ki sapne sach ho jate

काश की सपने सच हो जाते ,तो पंख लगा हम तेरे पास आते,तेरे होठों पे छाते एक मुस्कान बन के ,गीत मीठ सा कोई हम तुमको सुनते.काश की सपने सच हो जाते.......तो संग बादलों के तेरे पास आते ,जो तेरे तनको भिगोतीं बारिश की बूँदें तो छाँव तरु की बन ख़ुद में तुमको छिपाते काश की .............तो फूलों में बस के हम तेरे पास आते ,जो चूम लेते मुझे प्यार से तुम तो CHUT के तेरे हाथ से तेरे पैरों पे गिर जाते ,काश की .................................... तो कभी पुरवाई बन के कभी अंगडाई बन के ,कभी अरुणाई बन के कभी अमराई बन के ,हर रंग हर रूप में हम तेरे पास आते ,काश की सपने सच हो जाते ................................. .